हैलो दोस्तो, तो मैं शुरुआत इस वाक्या से करना चाहूगाँ कि " जब मै अपने-आप को नुूकसान पहूँचाने के ब...
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हैलो दोस्तो, तो मैं शुरुआत इस वाक्या से करना चाहूगाँ कि " जब मै अपने-आप को नुूकसान पहूँचाने के बारे में सोचता था । यहाँ तक की Suicide करने तक के विचार आने लगे थे। " बात ये है कि मैं उस वक्त study करने के लिए. घर से दूर रहता था , सच बताऊँ तो उस वक्त में अपने आप को धोखा दे रहा था, अपने आप से चीजों को लेकर झूठ बोलता, अपने -आप को धोखा देता, जब कि मुझे पता था कि इन सब बातों का आने वाले समय में मेरी जिन्दकी पर गहरा असर पडेगा। चीजों को, अपनी study को, कल पर टालता रहता था कि अभी समय है, हो जायेगा, थोडा और mobile चला लो। एक और Series देख लो । ऐसे करते-करते जब deadline पास आ जाती तो घबराने लगता , tension लेने लगता, अपने-आप को कौशने लगता, खुद को नुकसान पहूँचाने के बारे में सोचता । जाहिर सी बात है कि इस सब से मेरी Health पर भी असर होने लगा, मैं tension में अपना ध्यान उस जगह से हटाने के लिए mobile चलाने लगता । अपने phone की Contact list को देखता कि मैं, परेशानी में इस वक्त किस को call कर सकता हूँ " और आपको इक बात बताऊँ 110+ Contact होने के बाबजूद , कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं था जिसको मैं Call कर अपनी परेशानी बता सकता " । मैं अपने आप को अकेला , कमजोर, मजबूर और दुनिया से अलग सा महसूस करता । मुझे लगता मेरा कोई नहीं है, किसी को मेरी कोई फिक्र नहीं है। मेरे साथ ही ऐसा क्यों है। धीरे-धीरे यह परेशानी और भी ज्यादा होती गई । मैं कई दिनों तक ऐसे ही बिस्तर पर पडा रहता औऱ घंटों तक mobile पर time पास करता रहता । एक दिन मैं , Washroom में कई घंटों तक अपने आप को आईनेें में देखाता रहा, मानों कोई मुझसे कुछ कह रहा हो , बस मैं खडा होकर अपने ही आप को देख रहा था, मन में विचार आ रहे थे कि मैं ये सब किस के लिए कर रहा हूँ , मैं यहाँ क्यों हूँ , जब मेरे कोई है हि नहीं तो मैं इस दुनिया में क्या कर रहा हूँ। मैैं आप लोगों को बता भी नहीं सकता उस समय मेरे दिमाक में क्या-क्या चल यहा था। मैं सच में बहुत परेशान था-- अपने आप से , अपने द्वारा लिए गऐ हर एक decision से, मैंं मन ही मन खुद को कौश रहा था। अचानक मुझे कुछ हुआ और मैं Washroom से बाहर आ गया , और फिर सोचा--ये क्या था। मैं पहले तो कभी ऐसा नहीं था, मैं खुद को क्यों नुकसान पहुँचाने लगा, यह शरीर मेरा है। मेरी बचपन की बहुत सारी अच्छी यादें हैं, मैं उन सब को ऐसे एक पल में खत्म नहीं कर सकता । तब मैं decide किया कि अब और नहीं । मैनें अपने आप को समझाया , उन खुबसुरत पलों को याद किया जो कभी मैनें जीये थे। मैंने धीरे -धीरे उन चीजों को लिखा जिनकी वजह से -मेरे साथ ये सब हो रहा था। उनका Solution पाने की कौशिश की । धीरे- धीरे मैंनें अपने आप को उस हद तक बेहतर कर लिया कि उसके बाद फिर कभी मेरे साथ ऐसा नहीं हूआ। मै आपको बताना चाहूँगा कि उस सब से बाहर आने कि journey बहुत ही खुबसुरत थी । मैं इस को फिर कभी लिखुँगा । एक बात तो है कि तुम हर एक बुरी से बुरी situation से बाहर आ सकते हो, अगर तुम बाहर आना चाहो तो । OKAY Guys, अब फिर कभी । Lost of love you guys. खुश रहो और आबाद रहो।

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